देहरादून की रितिका का स्टार्टअप, जानवरों की सेवा में जाता है कमाई का आधा हिस्सा

देहरादून: पहाड़ की वादियां युवाओं को भीतर से शांत बनाने के साथ साथ उनकी सोच को भी सकारात्मक रखने में सहभागिता निभाती हैं। देवभूमि के युवा इस बात का उदाहरण हैं। इसी क्रम में आज हम बात करने जा रहे हैं देहरादून में पली बढ़ी बेटी रितिका सडाना की। प्रकृति और धरती की सेवा के लिए रितिका ने एक बीड़ा उठाया है।

अपने पिता पिता नरेश कुमार व माता सुनीता सडाना के साथ जोहरी गांव, राजपुर रोड देहरादून में रहने वाली रितिका सडाना EcoKarma को संचालित करती हैं। यह कंपनी तरह तरह के बायोडिग्रेडेबल व ईको फ्रेंडली प्रोडक्ट तैयार करती है। जिससे प्रदूषण भी नहीं फैलता और साथ ही साथ उपभोक्ताओं व जानवरों के स्वास्थ्य पर भी कोई बुरा असर नहीं होता।

बता दें कि कंपनी द्वारा पेपर पेंसिल, बैंबू टूथ ब्रश, रीसाइकल्ड पेपर पेन, बैंबू व व्हीट स्ट्रॉ, कोकोनट शेल प्रोडक्ट के अलावा ईको स्टेशनरी, बाथ एवं ब्यूटी आदि के प्रोडक्ट बनाकर खुद ही पैक किए जाते हैं। 2019 में कर्मा नाम से पहली बार उत्पाद तैयार किए गए थे। रितिका सडाना बताती हैं कि सोच हमेशा से उत्पादों को टिकाभ बनाने व प्रकृति के लिहाज से बेहतर बनाने की रही।

रितिका सडाना की स्कूली शिक्षा दून इंटरनेशनल स्कूल तो ग्रेजुएशन 2012 में डीएवी कॉलेज से पूरा हुआ। इसके बाद उन्होंने सीए इंटरमीडिएट भी किया। लेकिन हमेशा से दिल में पनप रहे प्रकृति प्रेम व जनसेवा के भाव ने उन्हें कई एनजीओ के साथ जोड़ने का काम किया। रितिका पांच साल तक वेस्ट वॉरियर नाम के एनजीओ के साथ जुड़ी रहीं।

बचपन से ही एक डॉग लवर रहीं रितिका सडाना हमेशा से ही डॉग शेल्टर को लेकर काम करना चाहती थीं। इसी सपने ने रितिका को एक ऐसी कंपनी ख़ड़ी करने का आइडिया दिया जो कि पूरी तरह ईको फ्रेंडली उत्पादों पर काम करती हो। लिहाजा इसी क्रम में रितिका अपने सपने को भी जी रही हैं और प्रकृति को भी सहेज कर रखने में अहम भूमिका निभा रही हैं। खास बात ये है कि इस कंपनी का 50 फीसदी मुनाफा जानवरों के उद्धार के लिए खर्च किया जाता है।

The Better Uttarakhand Desk

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *