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उत्तराखंड:सर भाष्कर जोशी… अपने काम से बच्चों को ही नहीं बल्कि शिक्षकों को भी कर रहे हैं प्रेरित

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अल्मोड़ा: उत्तराखंड में बदलाव लाना है तो शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करना होगा। पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के मन से इन बात को बाहर फेंकना होगा कि वह किसी से कम हैं। संसाधनों की कमी के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में पढ़ रहे बच्चे आधुनिक उपकरणों से दूर रहते हैं। मार्च 2020 से कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है। ऐसे वक्त में पहाड़ी इलाकों में पढ़ाई और चुनौतीपूर्ण हो गई। डिजिटल इंडिया की बात भले ही हर कोई कर रहा हो लेकिन कई ऐसे गांव हैं जहां आज भी नेटवर्क नहीं आता। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए दूर निकलने पड़ता है। बच्चों को अपने कौशल से शिक्षक भास्कर जोशी एक नई राह दिखा रहे हैं। उनके काम करने का ढंग देखकर ऐसा लगता है मानों वह मिशन पर निकले हैं। मिशन पूर्ण शिक्षा… उच्च शिक्षा…

अल्मोड़ा जिले के धौलादेवी ब्लॉक के सुदूर राजकीय प्राथमिक विद्यालय बजेला में सहायक अध्यापक भास्कर जोशी अपनी स्मार्ट टीचिंग के लिए जाने जाते हैं। वह लंबे वक्त से इस दिशा में काम कर रहे हैं। बच्चों को किताबी ज्ञान के अलावा व्यक्तिगत सुधार में भी काम करते हैं। कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें वह नुक्कड़ नाटक के जरिए उन्हें पढ़ा रहे हैं। शिक्षक जोशी कहते हैं कि बच्चों का आत्मविश्वास और उत्साह बढ़ना बेहद जरूरी है। स्कूली स्तर पर इस पर काम होना चाहिए और बच्चा जब उच्च शिक्षा के लिए बाहर निकलेगा, वह खुद को किसी से कम नहीं समझेगा। हालांकि उनका कहना है कि छात्रों को हर वक्त कुछ सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए।

कोरोना काल के दौरान भास्कर जोशी ने सोशल मीडिया के समूह के जरिए अपने स्कूल के बच्चों के अलावा राज्य के अन्य बच्चों को भी पढ़ाया। भास्कर जोशी के इस नेक काम के लिए कई बड़ी संस्थान उन्हें सम्मानित भी कर चुकी हैं। शिक्षा में तकनीक को बच्चों के करीब ले जाने के लिए शिक्षक भास्कर जोशी ने गूगल पर अपने स्कूल की वेबसाइट बनाकर 500 से ज्यादा वर्कशीट व खुद के तैयार एनिमेटेड वीडियो पोस्ट किए हैं। उनका लक्ष्य है कि इन वीडियो के जरिए देश विदेश के बच्चे को पढ़ाया जाए। वह उत्तराखंड के पहले गूगल सर्टिफाइड एजुकेटर बन गए हैं। वह बच्चों को ही नहीं बल्कि शिक्षकों को भी प्रेरणा दे रहे हैं।

वेबसाइट बनाने के बाद उन्होंने एक नया प्रयोग भी किया। शिक्षा को बच्चों के मोबाइल तक पहुंचाने के लिए उन्होंने एप बनाया है। इस ऐप का नाम उन्होंने बजेला ऑनलाइन रखा है।भाष्कर जोशी ने बताया कि ऐप निशुल्क है और लोगों के लिए यह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। भास्कर जोशी कहते हैं कि कोरोना वायरस के दौरान लगे लॉकडाउन का सही प्रयोग बेहद जरूरी था। बच्चों को पढ़ाई से ज्यादा दिन दूर रखा जाना शिक्षा को हल्के में लेने जैसा है।

ऐप में सौ से अधिक कॉमिक्स व बाल साहित्य भी अपलोड किए गए हैं। इस एप के जरिए बच्चों को दैनिक कार्य, साप्ताहिक वर्कशीट, मिशन कोशिश की कार्यपुस्तिका, विद्यालय की मैगजीन, संदर्भ ग्रंथ, प्रश्नोत्तरी, समर कैंप की गतिविधि, एनसीईआरटी की किताबें, नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी, कॉमिक्स एक क्लिक पर ही प्राप्त हो रही हैं। बच्चों को पढ़ाने से पहले भास्कर जोशी खुद को तैयार करते हैं। वह सुबह ऐप को रोजाना अपडेट करते हैं ताकि बच्चों को नवीनतम ज्ञान मिले। इस ऐप की तारीफ कई अभिभावकों द्वारा की जा चुकी है। इस ऐप में भास्कर जोशी ने सुरक्षा के लिए पॉस्को बटन का विकल्प भी दिया है। एक बटन दबाने पर चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क कर सकता है। इसके अलावा वह तमाम रिसर्च भी करते हैं जो शिक्षा व्यवस्था को सुधारने में काम आए।

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