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हल्द्वानी स्टेडियम से IPL मुंबई इंडियंस टीम तक, उत्तराखंड के क्रिकेटर दीक्षांशु नेगी सच में खास है

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हल्द्वानी:  उत्तराखंड में क्रिकेट की शुरुआत साल 2018 में हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे पहले राज्य की टीम नहीं थी जो घरेलू क्रिकेट में भाग ले। बीसीसीआई ने साल 2018 में उत्तराखंड को मान्यता दी और साल 2019 में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को संचालन की जिम्मेदारी सौंपी। भले ही राज्य तीन साल से क्रिकेट खेल रहा हो लेकिन यहां के खिलाड़ी दूसरे राज्यों में कमाल का खेल दिखा रहे थे और अभी भी दिखा रहें हैं।

आज हम हल्द्वानी निवासी दीक्षांशु नेगी के बारे में बात करेंगे। हल्द्वानी स्टेडियम से क्रिकेट शुरू करने वाला ये खिलाड़ी आज मुंबई इंडियंस टीम में शामिल है। दीक्षांशु को आईपीएल की सबसे कामयाब टीम ने बतौर सहयोगी खिलाड़ी टीम में जोड़ा है। इसके अलावा साल 2019-2020 सीजन में वह उत्तराखंड के लिए रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे। साल 2020-2021 सीजन में दीक्षांशु ने विजय हजारे ट्रॉफी में गेंदबाजी में इतिहास रचा। वह एक पारी में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बनें।

दीक्षांशु नेगी की शुरुआत

लालडाठ हल्द्वानी निवासी दीक्षांशु नेगी ने सबसे पहले हल्द्वानी स्टेडियम ज्वाइन किया। वहां उनकी मुलाकात कोच दान सिंह कन्याल से हुई। दीक्षांशु ने एक निजी वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में बताया कि समर कैंप के लिए उन्होंने क्रिकेट ज्वाइन किया था। पहले वह तेज गेंदबाजी करते थे और आखिरी में छक्के-चौके मारना पसंद करते थे। धीरे-धीरे उनका शौक बढ़ा तो वह क्रिकेट को लेकर गंभीर हो गए। कोच दान सिंह कन्याल ने उनकी मदद की।

दीक्षांशु ने हल्द्वानी क्रिकेटर्स क्लब से अपनी शुरुआत की। दीक्षांशु ने बताया कि घर में पढ़ाई को लेकर भी माहौल गंभीर था। परिजनों को था कि पहले पढ़ाई पूरी करो और फिर क्रिकेट के बारे में सोचना। दीक्षांशु ने डीएवी हल्द्वानी से पढ़ाई की है। वह कहते हैं कि उस दौर में हल्द्वानी में रहते हुए क्रिकेट केवल यूनिवर्सिटी तक सीमित था। इस दौरान दीक्षांशु ने कुमाऊं क्षेत्र में खूब नाम कमाया। साल 2009 में कोच दान सिंह कन्याल ने उन्हें बेंगलूरू जाने की सलाह दी और कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद वह बेंगलूरू गए।

दीक्षांशु नेगी कहते हैं कि परिजनों ने खेल के साथ नौकरी करने की सलाह दी थी। कर्नाटक में वह काफी डेज़ क्रिकेट खेले और उसी का फायदा उन्हें रणजी ट्रॉफी में हुआ। कर्नाटक में सीनियर्स ने उनकी मदद की और वह केपीएल में शामिल हो पाए। केपीएल में कई भारतीय खिलाड़ी खेलते थे और उनसे काफी कुछ सीखने को मिला। दीक्षांशु नेगी 6 साल तक केपीएल का हिस्सा रहे। उत्तराखंड को मान्यता मिलने के बाद दीक्षांशु ने देवभूमि का रुख किया। वह साल 2019 में टीम का हिस्सा बनें और शानदार प्रदर्शन किया। दीक्षांशु नेगी को बतौर ऑलराउंडर टीम में चुना गया था।

उत्तराखंड में दीक्षांशु का करियर

साल 2019-2020 में दीक्षांशु नेगी ने रणजी ट्रॉफी में उत्तराखंड के लिए सबसे ज्यादा 450 रन बनाए। इस बीच उनके बल्ले से तीन फिफ्टी निकली। जम्मू कश्मीर के खिलाफ डेब्यू में उन्होंने शानदार अर्द्धशतक जमाया था। वहीं सीमित ओवर क्रिकेट में दीक्षांशु ने शानदार गेंदबाजी की थी। साल 2020-2021 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के पहले मुकाबले में बड़ौदा के खिलाफ शानदार पारी खेली थी। दीक्षांशु नेगी ने नाबाद 77 रनों की पारी खेली थी। इसके बाद उन्हें केकेआर और मुंबई इंडियंस ने ट्रायल के लिए बुलाया था। इससे पहले विजय हजारे टूर्नामेंट में दीक्षांशु नेगी ने इतिहास रचा था। वनडे में पांच से ज्यादा विकेट लेने वाले वह राज्य के पहले गेंदबाज बनें । मिजोरम के खिलाफ दीक्षांशु ने 5 ओवर में 21 रन देकर 6 विकेट अपने नाम किए । वहीं बतौर स्पिनर वह पहले गेंदबाज बनें जिन्होंने वनडे में उत्तराखंड के लिए पांच विकेट हासिल किए थे। उत्तराखंड के लिए दीक्षांशु नेगी कुल 31 मुकाबले खेल चुके हैं। उन्होंने 855 रन बनाए। उनके बल्ले से चार फिफ्टी भी निकली। इसके अलावा गेंदबाजी में नेगी का प्रदर्शन अच्छा रहा है। उन्होंने 33 विकेट अपने नाम किए हैं।

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